रियलिटी टीवी शो भाबीजी घर पर हैं में लीड रोल प्ले करने वाले एक्टर आसिफ शेख ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह अभी तक 35 बार पर्दे पर औरत का किरदार निभा चुके हैं। आसिफ ने यह भी बताया कि ऐसे किरदार की तैयारी कैसे की जाती है।
पर्दे पर 35 बार औरत बन चुका है यह एक्टर
टीवी एक्टर आसिफ शेख अपने सीरियल ‘भाबीजी घर पर हैं’ के जरिए घर-घर में मशहूर हो चुके हैं। आसिफ इस शो में विभूति नारायण का किरदार निभाते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कई बार अलग-अलग तरह के लुक लेने पड़ते हैं। एक इंटरव्यू में आसिफ ने बताया कि वह अभी तक के अपने करियर में 35 से ज्यादा फीमेल कैरेक्टर कर चुके हैं।
21 से लेकर 86 तक के किरदार

आसिफ शेख ने हिंदी रश के साथ बातचीत में कहा- आपको यकीन नहीं आएगा, मैंने अभी तक फीमेल किरदार, 21 की उम्र से लेकर 86 या 90 तक के, कम से कम 35 फीमेल किरदार निभाए हैं। सिर्फ फीमेल किरदार।
तैयारी कैसे होती है?
महिला का किरदार निभाना उतना आसान नहीं है जितना देखने में लगता है। इसके लिए एक्टर को कई चरणों से गुजरना पड़ता है:
- बॉडी लैंग्वेज – महिलाएँ किस तरह चलती हैं, हाथ-पाँव कैसे हिलाती हैं, बैठने-उठने का ढंग, सब पर खास ध्यान दिया जाता है।
- आवाज़ में बदलाव – किरदार के हिसाब से आवाज़ को पतला और मुलायम बनाना पड़ता है। इसके लिए वे रोज़ाना अभ्यास करते हैं।
- मेकअप और कॉस्ट्यूम – साड़ी, गहने और विग पहनकर लंबे समय तक शूटिंग करना बेहद मुश्किल होता है।
- भावनात्मक संतुलन – केवल कॉमेडी ही नहीं, बल्कि महिला किरदार के भावुक पहलुओं को भी सही तरीके से दिखाना ज़रूरी होता है।
दर्शकों का रिएक्शन
जब भी वे स्क्रीन पर महिला बनकर आते हैं, तो दर्शक ठहाके लगाना शुरू कर देते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो तुरंत वायरल हो जाती हैं।
एक फैन ने लिखा:
“अगर ये सचमुच महिला होते तो कई बड़ी हीरोइनों को कड़ी टक्कर देते।”
चुनौतियाँ भी हैं
हालांकि महिला किरदार निभाने में मस्ती और कॉमेडी होती है, लेकिन इसके पीछे कई दिक्कतें भी हैं। भारी कॉस्ट्यूम पहनकर घंटों खड़ा रहना, हाई हील्स में चलना और मेकअप की वजह से त्वचा पर जलन होना जैसी समस्याएँ आम हैं। कई बार तो लंबे शूट के बाद थकान इतनी बढ़ जाती है कि आराम किए बिना कोई और काम करना मुश्किल हो जाता है।
लेकिन इस एक्टर का कहना है कि दर्शकों की हंसी और तालियाँ सारी मेहनत की थकान मिटा देती हैं।
निष्कर्ष
आज यह एक्टर इंडस्ट्री में कॉमेडी के मास्टर कहे जाते हैं। उन्होंने हर बार अपने महिला किरदार को अलग अंदाज़ में निभाया है – कभी मॉडर्न लड़की, कभी घरेलू औरत, तो कभी आंटी या दादी। यही वजह है कि दर्शक उनके हर रूप को पसंद करते हैं।
उनका कहना है:
“एक कलाकार का असली काम है हर किरदार को ईमानदारी से निभाना। चाहे वो हीरो हो, विलेन हो या औरत का रोल।”
इस तरह उन्होंने साबित कर दिया है कि अभिनय की कोई सीमा नहीं होती। सही समर्पण और मेहनत से हर किरदार को जिया जा सकता है।





